गलतियों का विश्लेषण और उनके सुधार।
गलती मानव से ही होती है(To err is Human). किशोरों से लेकर बूढ़े तक जीवन में हर उम्र में लोगों से गलतियां होते रहती हैं. जब गलती हो जाती है तो उसका प्रभाव भी तीव्रता के अनुरूप व्यक्ति के जीवन पर, उसके परिवार पर या समाज पर पड़ना स्वाभाविक है. अपनी गलती का आभास होने पर प्रायश्चित कर लेने से भी जीवन में सुधार हो जाता है. किशोरावस्था में तो लगता है कि अपनी गलती पकड़ी ही नहीं जायेगी। इस अवस्था को देहात में गदह पच्चीसी भी कहा जाता है आईये हम समझें कि गलती का आशय क्या है. पहले हम घर से ही शुरू करते हैं. बचपन में बताया जाता है कि हर सामान को रखने हेतु एक स्थान निर्धारित होता है. अगर हम अपने घरेलु सामानों को उसके निर्धारित स्थान पर रखेंगे तो जरुरत पड़ने पर वह सामान बहुत ही शीघ्रता से मिल जायेगा। कभी-कभी हमें अपने सामानों को रखने में इतनी हड़बड़ी होती है कि सामानों को जहाँ बुझाया वहीँ रख देते हैं। कुछ दिनों के बाद हम यह भी भूल जाते हैं कि उस सामान को हम कहाँ रखे थे और जब बाद में उस सामान की जरुरत होती है तब वह सामान समय पर नहीं मिलता और घर में...