एक पूर्व जमींदार साहेब का जलसा!
आज़ादी के कुछ ही सालों बाद सरकार द्वारा जमींदारी प्रथा समाप्त कर दी गयी. लेकिन जमींदार लोगों के पास अभी भी काफी जमीन बच गयी थी. एक ऐसे ही जमींदार साहेब को अपने और अपने खानदान की शान और अपने भविष्य की चिन्ता सताने लगी. उस जमींदार साहेब के इलाके के ही एक गांव में एक मेहनती किसान रहते थे. वे आसानी से पैसा कमाने या अनकर पैसा चतुराई से ले लेने में विश्वास नहीं रखते थे. उस किसान को नये ज़माने के साथ-साथ चलने की भी बड़ी ललक थी. इसलिये वे अपने एक मात्र पुत्र को एक बड़ा इंजीनियर बनाना चाहते थे. इसके लिये उन्होंने अपने पुत्र सुमित को हमेशा उत्प्रेरित करते रहते थे. अब उनके पुत्र के मन में भी इंजीनियर बनने की लालसा बढ़ने लगी और अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु मन लगाकर पढ़ने लगा. उसका मेहनत व लगन रंग लाया और उस लड़के का दाखिला एक अच्छे सरकारी इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थान में हो गया. जब उक्त जमींदार साहेब को इस बात की जानकारी हुई कि उनके इलाके का एक किसान के बेटे का नाम इंजीनियरिंग में लिखा गया है तब यह बात उनकी शान पर बन आयी. उन्होंने अपने कु...