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धर्मान्तरण के कुछ अजीबो-गरीब तरक़ीब! (For Adults Only)

     इधर कुछ वर्षों से धर्मान्तरण पर बहुत कुछ पढ़ने और देखने हेतु सभी तरह के मीडिया में सामग्री मिल रही है. इस विषय पर काफी बहस भी हो रही है. बहुत से नकली बाबाओं की पोल भी खुल रही है. यह तो सर्व विदित है कि नकली बाबाओं के फलने-फूलने के पीछे हमारे समाज में व्याप्त अन्ध-विश्वास एक बड़ा कारण रहा है. कुछ को विश्वास है कि "बाबा" हमारी पुरानी बीमारी ठीक कर देंगे; "बाबा" हमें जल्दी धनी होने की तरक़ीब बता देंगे तो कुछ को विश्वास है कि "बाबा" की कृपा से बाँझ औरतों को भी सन्तान-सुख प्राप्त हो जायेगा। बहुतों को विश्वास है कि "बाबा" की कृपा से प्रोन्नत्ति हो जाएगी, उनकी कृपा से शादी जल्दी हो जाएगी या उनकी कृपा से व्यवसाय फलने-फूलने लगेंगे। कहा तो यह भी जाता है कि बाबा की कृपा से मिलने वाले सुखों का कोई अन्त नहीं है. इन्ही सब सुखों की लालसा का लाभ "बाबा" के दलाल उठाते हैं और अन्ध-विश्वासियों को "बाबा" के पास जाने के दुष्प्रेरित करते रहते हैं.      सभी तरह के अन्ध-विश्वासों के जड़ में गरीबी और अशिक्षा ही है. सभी तरह के सुखों की चाहत और वह भी ...

धार्मिक उन्माद मानवता के विरुद्ध एक अपराध है!

      1953 में पश्चिमी देशों की कम्पनियों ने अरब देशों में कच्चे तेल खोज कर व्यावसायिक रूप से काफी लाभदायक बना दिया। इससे अरब देशों में बेशुमार दौलत आने लगी. शासक वर्ग अपने शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिये धर्म का सहारा लेने लगे. आधुनिक इतिहास में धर्म का दुरूपयोग यहीं से शुरू होता है. इसके पहले नेपोलियन ने सफलता पूर्वक धर्म को राजनीति से अलग किया था. उसके राज के इस काल खण्ड में फ्रांस में विकास भी अधिक हुआ था. वहां की लड़कियों और महिलाओं को अधिकतर अधिकार उसी काल-खण्ड में मिले थे.        अस्सी के दशक में सोवियत सैनिकों को अफगानिस्तान से भगाने के लिये भी धर्म का सहारा लिया गया था. इसके लिये अफगानिस्तान की सीमा पर बड़े पैमाने पर मदरसे खोले गये थे. इन मदरसों में प्रारम्भिक शिक्षा के साथ-साथ जिहाद(दूसरे धर्म के लोगों के विरुद्ध युद्ध) की भी शिक्षा दी जाने लगी. उन क्षेत्रों में ईश-निन्दा कानून पहले से ही लागू था, लेकिन आपराधिक न्याय प्रणाली कमजोर होने के कारण प्रायः पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता था और ईश-निन्दा के आरोपियों को प...

अयोध्या के श्रीराम मन्दिर-बाबरी मस्जिद के झगड़े का एक समाधान!

     जब तक श्री राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद का ताला नहीं खुलवाया था तब तक बहुत कम लोगों को यह झगड़ा मालूम था. मुझे तो उस समय तक इसके बारे में कुछ पता नहीं था. यह मेरा दुर्भाग्य ही था. संतोष की बात यही थी कि इस मामले में मैं अकेला नहीं था. उसके बाद तो समाचार-पत्रों में बहुत कुछ पढ़ने को मिला और आगे भी पढ़ने को मिलता रहेगा। उसके बाद श्री राजीव गांधी द्वारा श्री राम मन्दिर का शिलान्यास भी कराया गया. मैं यहाँ पर ताला खुलने के समय के कुछ श्रुति सम्मत बातों के आधार पर अयोध्या-बाबरी मस्जिद के झगड़े का एक समाधान का जिक्र करना चाहता हूँ, जो उस समय मुझे एक बुजुर्ग द्वारा बताया गया था.      अयोध्या-बाबरी मस्जिद के झगड़े में तीन तथ्य स्पष्ट हैं-- 1. श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ था जबकि बाबर का जन्म कई देश पार उज्बेकिस्तान में हुआ था अर्थात अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़ा है न कि क्रूरता के लिये नमी बाबर से. हिन्दुओं के दिलों में श्री राम का स्थान कई हजार वर्षों से ऐसे बन गया है कि उनको निकाला नहीं जा सकता। अधर्मियों या व...