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उपनाम लिखने की परम्परा

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एक प्रश्न और जिज्ञासा बहुत दिनों से समाज में चल रहा है कि आखिर हमारे देश में उपनाम लगाने या लिखने का आरम्भ कब से हुआ? समय समय पर पूर्व में भी यह प्रश्न लोगों के मन में उठते रहा है। बड़ों से मुझे जो जानकारी मिली है उसके अनुसार उपनाम लिखने की परम्परा रोमन साम्राज्य से प्रारम्भ हुआ। पहले तो श्री राम, श्री कृष्ण, महावीर, सिद्धार्थ, बाल्मीकि, धनवंतरी आदि के नामों में तो उपनाम हैं ही नहीं।                           श्रीराम यह सर्वविदित है कि जिस काल में रोमन साम्राज्य का पतन हो रहा था उसी काल में इस्लामिक साम्राज्य का उत्थान हुआ। उपनाम लिखने की परम्परा इस्लाम के विस्तार के क्रम में भारत आया। मुस्लिम राजाओं ने ही हमारे देश के लोगों को कोई न कोई उपनाम देना प्रारम्भ किया। तब नाम में दो शब्द होने लगे। समय आगे बढ़ा और नाम में तीसरा शब्द भी जुड़ने लगा। आज भी केरल, गुजरात और महाराष्ट्र आदि राज्यों में पहले अपना नाम फिर पिता का नाम और अंत में उनके गांव का नाम। उत्तर भारत में तो आर्थिक सामाजिक हैसियत के अनुसार चार शब्दों के नाम का भी प्र...

यूक्रेन युद्ध का पंद्रहवां महीना

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 आज यूक्रेन युद्ध अपने पंद्रहवें माह में प्रवेश कर गया। इतने लम्बे समय तक एक महाशक्ति रूस के समक्ष यूक्रेन के टिके रहने के कारण तो सभी बता देते हैं लेकिन इतनी व्यापक क्षति के बाद भी यूक्रेनी अपनी जान क्यों दे रहे हैं इसका उत्तर कोई नहीं देता। चूंकि प्रति सप्ताह सैंकड़ों की संख्या में यूक्रेनी युद्ध की बलि वेदी पर चढ़ रहे हैं, जख्मी हो रहे हैं तो ऐसे बलिदान के पीछे उनका कोई न कोई यथोचित कारण होगा। समय बीतने के साथ वह कारण भी हमलोग जान ही जायेंगे। यूक्रेन का विनाश तो जग जाहिर है। थोड़ा हम रूस के बारे में समझने की चेष्टा करते हैं। विश्व अर्थव्यवस्था के प्रसिद्ध यूट्यूबर Joe Blogs के अनुसार इस वर्ष के प्रथम तिमाही में युद्धरत रूस की अर्थ व्यवस्था गिरावट पर है। उनके अनुसार रूस के पास युद्ध पूर्व संचित निधि $150 अरब डॉलर थी जिसमे गत वर्ष कुछ वृद्धि हुई थी। गत तिमाही में उसके निर्यात के तेल और गैस की आय में 45% की कमी आई है। जिस तरह से इस वर्ष के प्रथम तिमाही में उसकी संचित निधि से धन की निकासी हो रही है उस दर इस वर्ष के अंत तक उसकी संचित निधि समाप्त हो सकती है। यह सब यूक्रेन युद्ध के तत्...