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सरकारी अस्पताल की इलाज और राजनीति

    एक नेताजी ने टिकट दिलाने की लॉबी करने वाले कुछ लोगों को प्रभावित कर विधायक का टिकट प्राप्त करने में सफलता प्राप्त कर ली लेकिन उनके लिये चुनाव जीतना काफी कठिन था. उनके लिये चुनाव जीतना इसलिये भी कठिन था क्योंकि उनके पार्टी के विपरीत चुनावी लहर चल रही थी. उनके पक्ष में एक बात बहुत मजबूत थी कि जिस नेता के पुत्र होने का दावा कर उन्होंने छल से ही टिकट प्राप्त किया था उनका इलाका में बहुत प्रभाव था. वो प्रभावशाली नेताजी अब वृद्ध हो गये थे और बीमार चल रहे थे. इन कारणों से उनकी राजनैतिक गतिविधि लगभग शून्य सी हो गयी थी. उस समय उस इलाके में संचार की व्यवस्था भी कमजोर थी. इसके अलावे विपरीत राजनैतिक लहर चलने के कारण उनके पार्टी के अन्दर कोई विशेष प्रतिस्पर्द्धा भी नहीं चल रही थी.     विधायक के उम्मीदवार( अब आगे से नेताजी ) अपने चुनाव क्षेत्र में अपनी पार्टी के अपने क्षेत्र के उक्त बुजुर्ग नेता को हवाला देकर कई बड़े नेता की चुनावी रैली कराने में सफल रहे. नेताजी सभी रैलियों में मंच पर अपने बुजुर्ग नेता(अपने कथित पिता) का फोटो लगाना नहीं भूलते थे. चुनाव समाप्त हु...

एक बेरोजगार की भीष्म-प्रतिज्ञा!

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     एक गाँव के एक लड़का को नौकरी मिलते-मिलते रह जाती थी। उसके पिता किसी निजी कम्पनी में उसे छोटा-मोटा काम भी नहीं करने देते थे; खानदान के इज़्ज़त का जो सवाल था। नौकरी नहीं मिलने के लिये वह लड़का अपने किस्मत को दोष देता जबकि उसके पिता आरक्षण को।      एक दिन वह लड़का एक लैपटॉप की मांग अपने पिता से कर बैठा। उसके दहेज़ लोभी पिता ने उसे समझाया कि लैपटॉप उसकी शादी में दहेज़ में मिल जायेगा। इस पर वह लड़का भड़क गया। उस लड़के ने गुस्से में आकर एक भीष्म-प्रतिज्ञा कर डाली कि जब तक हमारे नेताजी प्रधान मन्त्री नहीं बन जाते तब तक वह शादी नहीं करेगा। उसने सबको बताया कि नेताजी के प्रधान मन्त्री बन जाने से सब बेरोजगारों को एक-एक स्मार्ट फोन मिल जायेगा और सभी को नौकरी भी मिल जायेगी। इस तरह देश की सभी समस्यायों का समाधान हो जायेगा।      वह लड़का अब नेता बन गया और अपनी भीष्म-प्रतिज्ञा को पूरी करने में जुट गया। एक व्यक्ति अपनी उम्र की सीमा पार करने पर भी बेरोजगार रह गया था. उसने नये नेताजी से पूछ ही लिया।...