सृजन घोटाला संस्थागत विफलताओं का भी परिणाम है
आजकल बिहार के "सृजन घोटाला" की बड़ी चर्चा हो रही है. इस घोटाले के केन्द्र में सृजन नाम का एक गैर सरकारी(NGO) संगठन भागलपुर, बिहार में है. कुछ महीने पूर्व इस NGO की संचालिका मनोरमा देवी की मृत्यु हो गयी. उसके उत्तराधिकारी मनोरमा देवी की विरासत को सम्हाल नहीं पाये, जिसके कारण भागलपुर के एक अधिकारी का लगभग दो करोड़ रुपये के चेक bounce हो गया यानि उस सरकारी चेक को यह कहकर बैंकवालों ने लौटा दिया कि उस अधिकारी के खाते में उतनी राशि उक्त तिथि को नहीं थी जबकि सरकारी बही-खातों में उसके बैंक खाते में उससे ज्यादा राशि होनी चाहिये थी. यह एक असामान्य घटना साबित हुई और हंगामा मच गया. यह घोटाला बिहार के बाहर भी अख़बारों, टीवी और सोशल मीडिया में अभी भी छाया हुआ है और भविष्य में भी काफी दिनों तक छाया रहेगा। अब सवाल उठता है कि इसका नाम "सृजन घोटाला" क्यों पड़ा? कुछ लोग तो इसे "पापड़ घोटाला" भी कहते हैं क्योंकि सृजन नाम के NGO की संचालिका स्व. मनोरमा देवी को अपने उस NGO को ज़माने में काफी पापड़ बेलने पड़े थे. पहले की व्यवस्था के अनुसार वित्तीय वर्ष के अन्त तक यानि इक्...