किरासन तेल, सौर ऊर्जा उत्पादों और मध्याह्न भोजन का पैसा सीधे लाभुक को दिया जाता तो उन्हें ज्यादा लाभ होता!
पुराने ज़माने में लोग रौशनी के लिए करंज, रेंड़ी, महुआ, अलसी आदि तेलों का उपयोग अपने घरों में ढिबरी या दीपक जलाने में करते थे. यूरोप वाले इसके लिये अपने लैम्पों में जानवरों विशेषकर ह्वेल की चर्बी का उपयोग करते थे. कहा तो यह भी जाता है कि यदि किरासन तेल का अविष्कार समय पर नहीं होता तो इंसान अपनी सुविधा हेतु आख़िरी ह्वेल को भी मार देता। अक्सर पेट्रोल/डीजल में किरासन तेल मिलाकर बेंचने का समाचार कई सालों से मिलता रहा है. एक बार इंडियन आयल का एक बहादुर और कर्तव्य परायण अधिकारी मंजु नाथ ने एक पेट्रोल पम्प पर मिलावट की जाँच करने की धृष्टता की थी. ताकतवर मिलावटखोरों ने तो मंजु नाथ की जान ही ले ली थी. पेट्रोल/डीजल में किरासन तेल मिलावट से गाड़ियों के इंजन पर ज्यादा भार पड़ता है और इसके चलते गाड़ियाँ ज्यादा ख़राब हो रहीं हैं. परिणामस्वरूप वाहन मालिकों को अपना बहुमूल्य समय वाहन मिस्त्रियों के यहाँ बिताना पड़ता है और उनके वाहनों के रख-रखाव पर ज्यादा खर्चा आ रहा है. इसी तरह मध्याह्न भोजन खाकर बिमा...