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किसानों की कुछ ध्यान देने योग्य समस्यायें.....

हालांकि यूरिया की उपलब्धता और E-NAM के चालू होने से किसानों में ख़ुशी की लहर है, फिर भी किसान काफी समस्यायों से चिन्तित रहते हैं। कुछ समस्यायें और उनके निदान की चाहत निम्न प्रकार की हैं:- 1. सिंचित क्षेत्र के किसानों की मुख्य समस्या उनके फसल का उचित मूल्य नहीं मिलना है। बड़ी उम्मीद के साथ सरकार से किसान इस ओर टकटकी लगाये हुए हैं। 2. असिंचित क्षेत्र के किसान उम्मीद लगाये हुए हैं कि वर्षों लम्बित पड़ी योजनायें ही पूरी कर दी जायें तो किसानों की आमदनी बढ़ जायेगी। 3. किसान कम फसल से ज्यादा परेशान अधिक फसल हो जाने पर हो जाता है क्योंकि तब फसल का बाजार मूल्य काफी गिर जाता है। 4. फसल बीमा में नीलगाय, हाथी, बन्दर आदि जानवरों से हुए नुकसान को शामिल नहीं किया गया है। किसान चाहते हैं कि ऐसे नुकसान को भी बीमा योजना में शामिल किया जाये। 5. बहुत से किसान चाहते हैं कि गेहूं, धान, तिलहन, दाल आदि के भण्डारण क्षमता को बढ़ाया जाये ताकि उनके फसल बाजार में आने पर उनका मूल्य ज्यादा न गिरे। 6. आलू और प्याज के भण्डारण हेतु उचित मात्रा में कोल्ड स्टोरेज बनाया जाये। 7. जब खाद्यान्न और खाद्य ...

भूमि अधिग्रहण समस्या के कुछ साधारण समाधान!

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     इधर कुछ महीने से भूमि अधिग्रहण पर काफी गरमा-गरम बहस छिड़ी हुई है. जो नेता पहले भूमि-अधिग्रहण का विरोध करते थे अब समर्थन करने लगे हैं और जो समर्थन करते थे अब विरोध करने लगे. अंग्रेजों ने 1894 में पहला भूमि अधिग्रहण कानून बनाया था और उसी के अनुसार दो वर्ष पहले तक भूमि अधिग्रहण होता रहा. भूमि अधिग्रहणों से बड़ी संख्या में किसान विस्थापित हुए हैं. उनके पुनर्वास हेतु कई योजनायें भी चलायी गयी हैं लेकिन उन योजनाओं से विस्थापितों का कितना कल्याण हुआ वह विस्थापित ही बता सकते हैं.      पुनः दूसरा भूमि अधिग्रहण वर्ष 2013 में UPA सरकार ने पास किया। यह कानून इतना पेंचीदा और अव्यवहारिक है कि इसके अन्तर्गत किसी भूमि का अधिग्रहण नहीं हो सका.  यह विडम्बना ही है कि ऐसे बहुत नेता हैं जिन्होने पूर्व में इस कानून का समर्थन किया था वे अब उसे अव्यवहारिक मानकर भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाये है, जिसका अभी विरोध हो रहा है. ऐसा दुनिया में शायद ही कहीं हुआ हो की विस्थापितों के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गयी हो.      प्रायः निम्न तीन बि...

खाद्यान्न की खरीद, उसके भण्डारण और वितरण हेतु एक छोटा कदम!

    हमारे देश में खाद्यान्नों की खरीद, उसके भण्डारण और वितरण की व्यवस्था Food Corporation of India द्वारा किया जाता है. अधिक अन्न उपजाने वाले किसान अपना धान गेहूं आदि अपने ट्रैक्टरों पर लाद कर FCI के खरीद केन्द्र तक ले जाते हैं और वहाँ उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है. बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ किसान बताते हैं कि उन्हें FCI के बाबू लोगों से काफी आरजू-मिन्नत भी करनी पड़ती है और दलालों का सामना भी करना पड़ता है. कभी-कभी तो उन्हें MSP से भी कम दाम पर अपना खाद्यान्न बिचौलियों के हाथों बेंचना पड़ता है.     इस व्यस्था से पीड़ित अधिकांश किसान अपना खाद्यान्न साहूकारों के हाथों बेंचते हैं या अपना खाद्यान्न निकट के चावल/आटा मीलों के पास पँहुचा देते हैं और उन्हें पैसा बाद में लेने के लिए बुलाया जाता है. अन्ततः किसानों को इतनी परेशानियों के बाद भी उनकी अपेक्षा के अनुसार अपने खाद्यान्नों का मूल्य नहीं मिलता है तथा परिवहन आदि में अनावश्यक खर्च भी होता है.     सभी ग्राम पंचायतों में निचले सरकारी विद्यालयों में चलने वाले मध्यान्न भोजन हेतु चावल च...