PSU के निर्माण/विनिवेश से भी राष्ट्रीय सम्पदा का सृजन हो सकता है.
प्रथम, द्वितीय और तृतीय पञ्च वर्षीय योजनाओं में मिश्रित अर्थ-व्यवस्था पर काफी जोर दिया गया और सिर्फ यही व्यवस्था हमारे देश के अनुकूल बताया गया. यह भी बताया गया कि मिश्रित अर्थ-व्यवस्था ही हमारे देश को एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा। इसी अवधारणा को साकार करते हुए बोकारो, चितरंजन, दुर्गापुर, हटिया, राउरकेला और भिलाई आदि स्थानों पर बड़े-बड़े केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रम लगाये गये. इन्ही नीतियों का अनुसरण करते हुए राज्य सरकारों ने भी बहुत से सार्वजनिक उपक्रम लगाये। इन उपक्रमों के चालू हो जाने से प्रगति का एक नया युग का प्रारम्भ हुआ और बड़ी संख्या में प्रतिभावान लोगों को नौरकरी मिली तथा आगे भी विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ने की प्रेरणा मिली। फिर पिछली शताब्दी के सत्तर के दशक के आसपास आया राष्ट्रीयकरण का एक युग. इस युग में निजी कोयला कम्पनियों, निजी बैंकों आदि का राष्ट्रीयकरण किया गया. इससे भी कई निजी कम्पनियाँ रातोंरात सरकारी कम्पनियों में बदलने लगीं। अब ये सभी कम्पनियाँ सरकारी उपक्रम कहलाने लगीं। अस्सी के दशक में इ...