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आगामी एलन मस्क-पुतिन वार्ता के निहितार्थ

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 कुछ दिन पहले एलन मस्क ने ट्विटर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को वार्ता के लिये निमंत्रण दिया था। श्री एलन मस्क प्रसिद्ध स्पेसएक्स, टेस्ला आदि कम्पनियों के सीईओ हैं। वहीं व्लादिमीर पुतिन भी लम्बे समय से रूसी सरकार के प्रमुख पद पर आसीन हैं। वे आगे भी कुछ वर्षों तक रूस के शासनाध्यक्ष रहेंगे। प्रायः इस तरह की वार्ता किसी कम्पनी के सीईओ और किसी राष्ट्राध्यक्ष के बीच नहीं होती है। श्री पुतिन ने भी इस वार्ता में अपनी दिलचस्पी दिखायी है। वार्ता मस्क के पसंदीदा सोशल मीडिया एप्प ClubHouse पर होनी है। अभी इस वार्ता की तिथि निर्धारित नहीं हुई है। ऐसे दो दिग्गज लोगों की वार्ता के कुछ विशिष्ट निहितार्थ निश्चित ही होंगे। उन्ही निहितार्थों की चर्चा यहाँ की जा रही है।   युवा एलन मस्क नीचे वाला ट्वीट पढ़ने से बहुत कुछ समझा जा सकता है। मंगल ग्रह के प्रति एलन मस्क की आशक्ति जगजाहिर है। वर्ष 2001 में वे एक राकेट खरीदने के उद्देश्य से रूस गये थे। वहाँ वेे रूसी अंतरिक्ष संस्थान से एक रॉकेट  क्रय करने का प्रताव दिया था। रूसी अंतरिक्ष संस्थान के अधिकारियों ने नवजवान एलन मस्क की प...

LFP बैटरी में ही हमारा भविष्य है

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  अभी दुनियाभर में दर्जनों केमिस्ट्री पर बैटरी बन रही है। लेकिन मोटा-मोटी बैटरी केमिस्ट्री का वर्गीकरण किया जाये तो उनमें से लिथियम-निकेल, लिथियम-निकेल-मैंगनीज और लिथियम-आयरन-फॉस्फेट प्रमुख है। यहाँ पर LFP बैटरी अर्थात लिथियम-आयरन-फॉस्फेट बैटरी पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह दशक बैटरी का दशक होने जा रहा है। सोलर पावर तभी है जब सूर्य भगवान चमक रहे हैं। उसी प्रकार पवन ऊर्जा तभी उपलब्ध है जब हवा बाह रही है। लेकिन इन दोनों की अनुपस्थिति में बिजली के रूप में ऊर्जा प्राप्त करने हेतु उपरिजित ऊर्जा का भंडारण बैटरी में किया जाना आवश्यक है। भारत में LFP बैटरी हेतु कच्चा माल पर्याप्त रूप में उपलब्ध है। इसी में हमारा भविष्य दिख रहा है। गाछ के पीछे सूर्य देवता आकाश में ऊपर उठ रहे हैं। अर्थात भारत ऊर्जावान होने के पथ पर है। अ लिथियम-आयरन-फॉस्फेट में उपयोग होने वाला आयरन फ़ॉस्फ़ेट हमारे देश में प्रचुरता से उपलब्ध है। यह भी निर्विवाद रूप से सत्य है कि इस पदार्थ की उपलब्धता में अगले कई हजार वर्षों तक कोई कमी नहीं होने वाली है। इसके विपरीत निकेल और मैंगनीज की उपलब्धता हमारे देश में अत्यंत ही कम ...

टेस्ला का भारत मे पदार्पण

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 पिछले वर्ष के अंत में प्रसिद्ध अमरीकी कम्पनी टेस्ला ने "Tesla Motors(India) and Energy Pvt Ltd" नाम से एक कम्पनी हमारे देश में निबंधित करायी है। अभी इस कंपनी में तकनीकि की राजधानी माने जाने वाले शहर बेंगलुरू में अपना मुख्यालय रखा है। विश्वभर में यह कम्पनी बैटरी चालित मोटर वाहन बनाने में अभी शीर्ष पर है। टेस्ला अपनी विस्तार नीति के अंतर्गत भारत सहित अन्य देशों में भी पदार्पण की योजना बना रही है। अभी यह कम्पनी बैटरी चलित गाड़ियों के अलावे बैटरी, सोलर पैनल, सोलर टाइल्स और अपनी गाड़ियों के लिये विद्युत मोटर भी बनाती है।  सितम्बर 2015 में प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी टेस्ला के फ्रेमोंट कारखाना का भ्रमण करते हुए सीईओ एलन मस्क के साथ। टेस्ला के सीईओ अर्थात मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क अपने द्वारा स्थापित अन्य कम्पनी SpaceX और The Boring Company तथा Starlink आदि के भो सीईओ हैं। निश्चित रूप से वे इन कम्पनियों को भो भारत में लाना चाहेंगे। उन्होंने स्टारलिंक हेतु 42000 लघु सैटेलाइट अंतरिक्ष के निचले कक्षा में स्थापित करने की घोषणा कर रखी है। हो सकता है कि कुछ हजार अपने सैटेलाइटों...

हार में जीत की निशानी

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पाँच राज्यों में विधान सभा चुनाव के परिणाम ही सोशल मीडिया पर पार्टी की हार-जीत पर टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गयी है। लोग अपने मित्र-मण्डली में भी मोबाइल पर हार-जीत का विश्लेषण कर रहे हैं। जो मतदान नहीं भी करते हैं वे भी सक्रिय हो गये हैं। ये सब हमारे लोकतंत्र के लिये शुभ लगता है। जनता की भागीदारी ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान है। बीजेपी मध्य प्रदेश और राजस्थान में मामूली अन्तर से और छत्तीसगढ़ में भारी अन्तर से हारी है। तेलंगाना और मिजोरम में कांग्रेस पार्टी की भारी पराजय हुई है। इसी तरह तेलंगाना में तेलगु देशम को भी भारी पराजय का सामना करना पड़ा है। पार्टियों की इस हार में उनकी अगली जीत की निशानी भी छिपी हुई है. पार्टियों की हार के कारणों को भी समझना जरुरी है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार के कुछ कारण    पोलिटिकल इंटेलिजेंस की कमी:- कहने को तो भाजपा के पास कार्यकर्ताओं की भारी फ़ौज हैं, लेकिन जनता के मूड को भांपा नहीं जा सका। अगर प्रादेशिक या केंद्रीय संगठन अपने पोलिटिकल इंटेलिजेंस का सदुपयोग करता तो असंतुष्ट लोगों की राजनैतिक ...

मातृहन्ता: मनगढ़ंत अन्वेषण के दुष्परिणाम का एक सटीक उदहारण

ग्रामीण क्षेत्रों में किम्वदंतियों का बोलबाला होता है. लेकिन जब कोई ऐसा व्यक्ति कोई किम्वदंती सुनाये जिनकी विश्वसनीयता संदेह से परे हो तब लोग उस किम्वदंती की कहानी को सच मानने लगते हैं. ऐसी ही एक किम्वदंती के अनुसार--- एक गाँव में चार भाइयों का एक संयुक्त किसान परिवार रहता था. उनके पास कुल आठ बिगहा जमीन थी. उस परिवार में खुशहाली भी थी. अचानक एक भाई बीमार पड़ा. पहले इलाज की व्यवस्था भी अच्छी नहीं थी. अन्य भाइयों ने भी शहर में ले जाकर उसकी इलाज कराने में रूचि नहीं ली. बीमारी बढ़ती गयी और एक दिन उसकी की मृत्यु हो गयी. मृत भाई का एक दो साल का लड़का भी था. उस अबोध बच्चे की माँ की सुन्दरता भी उसके लिये मुसीबत बन गयी क्योंकि उसके पति का उससे बड़ा भाई उसपर अश्लील नज़र तो रखता ही था पर एक दिन उसने अश्लील हरकत भी कर दिया। वह औरत इससे तंग आकर अपने अबोध पुत्र को लेकर अपने नैहर चली गयी. उस अबोध बालक का लालन-पालन उसके मामा घर ही हुआ. तब तक वह अपने ममहर में ही वर्ग सात तक की शिक्षा ग्रहण कर ली थी. इसके आगे पढ़ने हेतु गाँव से पॉँच कोस दूर जाना पड़ता जो उसके आर्थिक वश नहीं था. जब वह बालक किशो...

संयुक्त विपक्ष यानि MVM(मोदी विरोधी मोर्चा) के जीत के निहितार्थ

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गुरुदासपुर(पंजाब) से लोक सभा उपचुनाव में भाजपा की हार का सिलसिला उत्तर प्रदेश के उपचुनाव तक पंहुच गया है. फुलपुर और गोरखपुर के उपचुनावों के परिणाम आ गये हैं. इन दोनों उपचुनावों में भाजपा के प्रत्याशियों की अनअपेक्षित करारी हार हुई है. इन दोनों लोक सभा क्षेत्र में सपा के प्रत्याशियों की जीत से ज्यादा भाजपा की हार की चर्चा हो रही है. इन दोनों क्षेत्रों की विशेषता सर्वविदित है. जहाँ फुलपुर से प्रथम प्रधान मंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू जीतते रहे हैं वहीँ गोरखपुर से यूपी के वर्तमान मुख्य मंत्री जीतते रहे है. गोरखपुर उनका कर्मभूमि भी है. वर्ष 1995 से धुर विरोधी रहे सपा से इस चुनाव में बसपा ने हाथ मिलाया है. सभी जानते हैं कि जब अचानक दो धुर विपक्षी अपने गिले-शिकवे भुलाकर मिले तो उस मिलन में किसी तीसरे शक्तिशाली शक्ति का हाथ रहता है. लेकिन अभी तक इस तीसरे शक्तिशाली शक्ति का पता लोगों को नहीं चल सका है. यह भी सम्भव है कि इन दोनों पार्टियों में सत्तासुख पाने की तीव्र इच्छा इन दोनों को मिलने का इस चुनाव में अवसर प्रदान किया हो. चार्ट के गहन अवलोकन से स्पष्ट है क...

बढ़ती जन-संख्या बेरोजगारी भी बढ़ा रही है

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हमारी स्वतन्त्रता के साथ ही हमारी जन-संख्या भी बढ़ रही है. जहाँ 1951 में हम 36 करोड़ थे वहीं 2011 में बढ़कर 121 करोड़ हो गये. पिछले दशक में हमारी जन-संख्या 1.77 प्रतिशत से बढ़ी है. अगर हम जन-संख्या की इसी वृद्धि दर के आधार पर गणना करें तो निम्नलिखित चार्ट के अनुसार वर्त्तमान में हमारी जन-संख्या 134 करोड़ होनी चाहिये(अगर यह गणना गलत लगे तो कृपया सुधारें). लेकिन इस जन-संख्या वृद्धि के अनुपात में हमारे यहाँ रोजगार नहीं बढ़ रहे है. इस बेरोजगारी बढ़ रही है.  वर्ष            जन-संख्या 2011         1,21,12,10,193 As per Census data 2012          1,23,26,48,613 2013          1,25,44,66,494 2014          1,27,66,70,551 2015          1,29,92,67,620, 2016          1,32,22,64,656, 2017          1,34,56,68,741 Calculated and expected  इसके अलावे हमारे पडोसी देशों से घुसपैठ के कारण भी...